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ऐसा करके वे माता से शांति की प्रार्थना कर सकते हैं.सामग्री तैयार करें: मिट्टी का पात्र (जिसमें जौ उगाने के लिए मिट्टी भरी हो)
पूजा के लिए एक स्वच्छ और शांत स्थान चुनें। वहां गंगाजल का छिड़काव करके स्थान को पवित्र करें।
यह समय आत्मज्ञान और ईश्वर के करीब जाने का अवसर प्रदान करता है।
अष्टमी या नवमी को दुर्गा पूजा के बाद नौ कन्याओं का पूजन करें और उन्हें तरह-तरह के व्यंजनों (पूड़ी, चना, हलवा) का भोग लगाएं।
गुप्त नवरात्रि हिंदू सनातन धर्म में अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक समय मानी जाती है। यह नवरात्रि विशेष रूप से गुप्त साधनाओं, तांत्रिक अनुष्ठानों, और महाविद्या की उपासना के लिए मनाई जाती है। इसे गुप्त इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसकी साधनाएं और अनुष्ठान गुप्त रूप से किए जाते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य आत्म-शुद्धि, शक्ति संचय और देवी के विभिन्न स्वरूपों की आराधना करना है।
गुप्त नवरात्रि अंतिम दिन दुर्गा पूजा के बाद घट विसर्जन करें।
ॐ नमो काली कंकाली महाकाली मुख सुन्दर जिह्वा वाली,
अखंड दीपक जलाएं और नौ दिनों तक जलने read more दें।
गुप्त नवरात्रि में करें ये साधना, जो चाहोगे वो मिलेगा
* जीवनसाथी या किसी खास मित्र से संबंधों में आ रहे तनाव को दूर करती हैं।
कलश के ऊपर नारियल रखें। नारियल को लाल वस्त्र में लपेटकर कलावा से बांधें।
कलश को मिट्टी के पात्र के बीच में स्थापित करें।
कलश के मुख पर आम या अशोक के पत्ते लगाएं।
ना करे रक्षा तो महाबली भैरव की दुहाई।।